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Difference Between MSME and Startup

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Difference Between MSME and Startup? कनफ्यूज रहने वाले बहुत से लोग हैं; उदाहरण के साथ समझो, फिर सबको बताओ!

जबकि स्टार्टअप इनोवेशन और तेज ग्रोथ पर जोर देते हैं, MSME पारंपरिक और स्थिर बिजनेस मॉडल पर आधारित हैं। हाल ही में सरकार ने डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए अधिक लचीले नियम बनाए हैं और स्टार्टअप की टर्नओवर सीमा ₹100 करोड़ से ₹200 करोड़ कर दी है।

Difference Between MSME and Startup

वर्तमान समय में Difference Between MSME and Startup समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों शब्दों को बिजनेस जगत में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन दोनों का मतलब और उद्देश्य अलग होता है। ज्यादातर लोगों ने हर नए बिजनेस को स्टार्टअप समझते हैं, लेकिन हर MSME या स्टार्टअप नहीं होता। आइए इसे आसानी से समझते हैं।

Difference Between MSME and Startup
Difference Between MSME and Startup

MSME क्या है?

Difference Between MSME and Startup, Micro, Small, and Medium Enterprises (MSME) का अर्थ है। यह ट्रेडिशनल या सेवा/निर्माण आधारित छोटे और मध्यम उद्यम हैं।

  • उत्पादन इकाई
  • किराना दुकान
  • छोटे उद्यम
  • प्रिंटिंग उपकरण
  • फर्नीचर उद्योग
  • लोक सेवा व्यवसाय

Difference Between MSME and Startup भारत में छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) की पहचान मुख्यतः निवेश और टर्नओवर पर निर्भर करती है। 1 अप्रैल 2025 से सरकार ने MSMEs का नवीनतम संशोधित वर्गीकरण लागू किया है। अब एक समग्र मानदंड (Composite Criteria) के आधार पर MSME की पहचान की जाती है। यह सिद्धांत दो बातों पर आधारित है:

  • संयंत्रों और मशीनरी/उपकरणों में निवेश
  • वार्षिक कारोबार (Annual Turnover)

MSME वर्गीकरण (सामग्री और सेवा उद्यमों दोनों के लिए समान नियम)

सूक्ष्म उद्यम

Difference Between MSME and Startup

  • संयंत्रों और उपकरणों में निवेश: ₹2,50,000 से अधिक नहीं
  • वार्षिक आय: 10 करोड़ रुपये से अधिक नहीं
  • इस श्रेणी में सबसे छोटे व्यवसाय आते हैं।
  • उदाहरणार्थ: छोटे सर्विस यूनिट, माइक्रो मैन्युफैक्चरिंग, स्थानीय व्यवसाय

छोटे उद्यम

  • संयंत्रों और उपकरणों में निवेश: 25 करोड़ रुपये से अधिक नहीं
  • सालाना कारोबार: 100 करोड़ रुपये से अधिक नहीं
  • इस कैटेगरी में बढ़ते हुए छोटे और संगठित व्यवसाय आते हैं
  • उदाहरणार्थ: छोटे कारखाने, राज्य ब्रांड, स्केलिंग सेवा कंपनियां

मध्यम उद्यम

  • संयंत्रों और उपकरणों में निवेश: 125 मिलियन रुपये से अधिक नहीं
  • वार्षिक आय: ₹500 करोड़ से ज़्यादा नहीं
  • इस श्रेणी में बड़े स्तर के मिड-साइज उद्यम शामिल हैं
  • उदाहरणार्थ: बड़ी कंपनियां, स्थापित उत्पादन कंपनियां, बड़े सेवा प्रदाता

एक महत्वपूर्ण मुद्दा

  • यह वर्गीकरण सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों पर लागू होता है।
  • MSME कैटेगरी निर्धारित करते समय निवेश और टर्नओवर दोनों देखे जाते हैं।
  • यदि कोई उद्यम इन तय सीमाओं के भीतर आता है, तो वह संबंधित छोटे और मध्यम उद्यम (MSME) श्रेणी में रखा जाएगा।

नवीन वर्गीकरण का लक्ष्य

  • तेजी से बढ़ते उद्यमों को छोटे और मध्यम उद्यम (MSME) दायरे में बनाए रखना
  • स्केलिंग कंपनियों को सरकारी फायदे से बचाना
  • कारोबार और निवेश दोनों का अधिक वास्तविक मूल्यांकन करना
  • माइक्रो, छोटे और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को मजबूत करना और रोजगार सृजन को बढ़ावा देना

Startup क्या है?

  • Startup एक ऐसा उद्यम है जो:
  • नवीन विचार लाता है
  • स्केलेबल अर्थात तेजी से विकसित होता है
  • Technology  या Innovation पर आधारित होता है
  • बड़े बाजार को लक्षित करता है
उदाहरणार्थ:
  • Technology Apps
  • D2C ब्रांड्स
  • SaaS कंपनियों
  • Fintech उपकरण
  • AI या टेक्नोलॉजी उत्पाद कंपनियां
  • आम बोली में: Startup = उच्च वृद्धि और नवाचार का उद्यम

रजिस्ट्रेशन करने से क्या अलग है?

Difference Between MSME and Startup

  • MSME दर्जा:
  • Udyam Registration के तहत होता है, जो सरकारी पोर्टल पर आसानी से रजिस्टर किया जा सकता है।
  • Startup दर्जा:
  • DPIIT (Startup India) के तहत दर्जा, इनोवेशन और स्केलेबिलिटी आवश्यक हैं।

फंडिंग में महत्वपूर्ण अंतर

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  • MSMEs को धन देना:
  • बैंक कर्ज
  • सरकारी कार्यक्रम
  • NBFC कर्ज
  • subsidy

Startup के लिए धन:

Difference Between MSME and Startup

  • Angry Investors
  • Venture Capital
  • Seed Financing
  • Funding for Series A, B, and C

Startups निवेश करते हैं, जबकि MSMEs यानी कर्ज पर चलते हैं।

सरकार ने हाल ही में स्टार्टअप का मतलब बदल दिया है

Difference Between MSME and Startup सरकार ने हाल ही में स्टार्टअप की व्याख्या में व्यापक बदलाव किया है। यह बदलाव तेजी से विकसित हो रहे स्टार्टअप्स को देखते हुए किया गया है। हाल ही में बहुत सी कंपनियां सिर्फ टर्नओवर लिमिट पार करने के कारण स्टार्टअप का दर्जा खो देती थीं।

टर्नओवर सीमा में महत्वपूर्ण बदलाव

Difference Between MSME and Startup

  • पहली स्टार्टअप मान्यता के लिए अधिकतम ₹100 करोड़ का निवेश आवश्यक था।
  • इस सीमा अब ₹200 करोड़ कर दी गई है।
  • अब अधिक आय वाली कंपनियां भी स्टार्टअप के रूप में मान्यता पा सकती हैं।
  • यह बदलाव हाई-ग्रोथ स्टार्टअप्स को राहत देगा।

इस परिवर्तन की आवश्यकता क्यों पड़ी?

Difference Between MSME and Startup

  • स्टार्टअप्स पहले से कहीं अधिक तेजी से हो रहे हैं
  • व्यापार चक्र (Business Cycle) और बिजनेस मॉडल अधिक जटिल हो गए हैं।
  • शुरुआती वर्षों में बहुत सी कंपनियां ₹100 करोड़ टर्नओवर पार कर चुकी थीं।
  • उनके विकास में पुरानी सीमा बाधा बन रही थी
  • सरकार ने इकोसिस्टम की वास्तविक वृद्धि को देखते हुए नियमों को संशोधित किया

अब स्टार्टअप्स को क्या लाभ मिलेगा?

Difference Between MSME and Startup

  • सरकारी फंडिंग स्कीमों तक अधिकतम पहुंच
  • टैक्स छूट का लंबी अवधि का लाभ
  • नियंत्रण राहत
  • इनक्यूबेशन और सरकारी सहायता कार्यक्रमों के लाभ
  • तेजी से विकसित होने वाली कंपनियों को स्केल करने में मदद

डीप टेक स्टार्टअप्स को विशेष दर्जा मिला

Difference Between MSME and Startup

  • Artificial Intelligence (AI)
  • रोबोटिक्स
  • Biotech
  • उन्नत उत्पादन

इन क्षेत्रों में काम करने वाले स्टार्टअप्स को अलग-अलग और लचीले नियमों का पालन करना चाहिए।

डीप टेक उद्यमों की आयु सीमा में बड़ा बदलाव

  • पहली स्टार्टअप मान्यता की अवधि दस वर्ष की थी।
  • डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए अब इसे 20 वर्ष कर दिया गया है।
  • मतलब अब ऐसे नवोदय उद्यमियों को लंबे समय तक नवोदय उद्यम का दर्जा बनाए रखना होगा
  • रिसर्च-आधारित कंपनियों को पर्याप्त समय मिलेगा

डीप टेक की टर्नओवर सीमा बढ़ी

  • Normal Startup: ₹200 करोड़ टर्नओवर सीमा
  • डिप टेक उद्यम: ₹300 करोड़ की टर्नओवर लिमिट

यानी हाइटेक कंपनियों को अधिक नीतिगत समर्थन मिला है

डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए नियमों में बदलाव क्यों हुआ?

  • R&D (Research and Development) में इन क्षेत्रों में अधिक समय लगता है
  • उत्पाद विकास का जेस्टेशन समय लंबा होता है
  • शुरूआती वर्षों में बहुत अधिक धन की आवश्यकता होती है
  • तुरंत रेवेन्यू आना आवश्यक नहीं है

इसलिए आम स्टार्टअप नियम उनके लिए नहीं थे।

निष्पादन

Difference Between MSME and Startup दोनों ही बिजनेस जगत में महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनके उद्देश्य, ग्रोथ मॉडल और जोखिम स्तर अलग हैं। स्टार्टअप इनोवेशन और तेज स्केलेबिलिटी पर जोर देते हैं, जबकि MSME स्थिर और पारंपरिक बिजनेस मॉडल पर चलते हैं। स्टार्टअप को सही रास्ता माना जाता है अगर आप स्थिर आय और कम जोखिम चाहते हैं, तो MSME बेहतर विकल्प हैं।


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